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सिद्धार्थ नगर- विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र ब्रॉंड अंबेस्डर होते हैं

कपिलवस्तु। किसी भी संस्थान में पुरातन छात्र उस संस्थान के एंबेसडर होते हैं। विश्वविद्यालय की सकारात्मक कार्यों को विद्यार्थियों व समाज के बीच ले जाने में उनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह बातें सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में प्रथम पुरातन छात्र सम्मेलन को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. हरि बहादुर श्रीवास्तव में कही। उन्होंने कहा कि पुरातन छात्रों के कार्य हमेशा संस्थान में ऊर्जा संचारित करने में महत्वपूर्ण होती है। पुरातन छात्रों का समूह विश्वविद्यालय को नित्य नए रूप में आगे बढ़ाने और संस्थान की समृद्धि और उन्नति में विशेष भूमिका का निवर्हन कर सकते हैं। भारत सहित दुनिया के तमाम संस्थाओं के उत्थान और विकास में पुरातन विद्यार्थियों की महती भूमिका रही है। सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में भी इस दृष्टि से आज का सम्मेलन न केवल वर्तमान के लिए बल्कि आने वाले भविष्य के लिए भी बहुत ही सकारात्मक ऊर्जा के साथ उपयोगी साबित होगा। कुलसचिव डॉ.अमरेंद्र कुमार सिंह ने कहा कि पुरातन छात्र वर्तमान विद्यार्थियों के लिए निरंतर प्रेरणा के स्रोत होते हैं। पुरातन विद्यार्थी विश्वविद्यालय में शैक्षिक वातावरण को न केवल सृजित करने में बल्कि वह शैक्षिक पर्यावरण को और समृद्ध करने में विशेष योगदान कर सकते हैं। पहली बार यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय में संपन्न हो रहा है, आगे भी निरंतर संपन्न होगा। अधिष्ठाता वाणिज्य संकाय प्रो. सौरभ ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में शिक्षक छात्र और संस्थान का अंतर संबंध बहुत महत्वपूर्ण होता है। संस्थान के संपूर्ण जीवन और उसके उपादेयता में शिक्षक छात्र की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी गई है। जब किसी संस्थान की उन्नति और प्रगति का आकलन किया जाता है तो उसके पुरातन छात्रों की भूमिका उनकी वर्तमान उपलब्धियां से ही उसका आकलन किया जाता है।
पुरातन छात्र सम्मेलन न केवल एक औपचारिक सम्मेलन है अपितु विश्वविद्यालय के प्रत्येक गतिविधियों में पुरातन विद्यार्थियों से सहयोग लेने की पूरी कार्य योजना तैयार की गई है। अधिष्ठाता विज्ञान संकाय प्रो. प्रकृति राय व पुरातन छात्र समिति की अध्यक्ष डॉ. सुनीता त्रिपाठी ने कहा कि जब कोई विद्यार्थी किसी संस्थान में आता है तो उसके अंदर अनेक असमंजस होते हैं। पुरातन छात्रों की भूमिका है कि ऐसे विद्यार्थियों के लिए अपने को उदाहरण के रूप में प्रस्तुत करें। डॉ. दिनेश प्रसाद, डॉ. कपिल गुप्ता, डॉ. संतोष कुमार सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त किए।

प्रद्युम्न कुमार दुबे, प्रवीण मद्धेशिया, प्रिया कौशल सहित कुछ पुरातन छात्रों ने अपने अनुभव प्रस्तुत किया। पुरातन विद्यार्थियों को कुलपति द्वारा सम्मानित किया गया। सकेत मिश्रा, निवेदिता श्रीवास्तव, खुशी, वंदना, शिवांगी, सितंगी, प्रिया ने सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया। इस दौरान डॉ. नीता यादव, डॉ. सुनील कुमार श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, डॉ. आशुतोष वर्मा उपस्थित रहीं। कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा वाजपेई ने किया।

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